राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जांच ने पकड़ी रफ्तार, जेल में बंद आरोपितों से भी हो सकती है पूछताछ

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जांच ने पकड़ी रफ्तार, जेल में बंद आरोपितों से भी हो सकती है पूछताछ

Ram Mandir donation theft case

Ram Mandir donation theft case

अयोध्या। Ram Mandir donation theft case, राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस की विवेचना अब नए चरण में पहुंचती दिख रही है। एक ओर 13 घंटे की पुलिस रिमांड के दौरान आरोपित अविनाश शुक्ल की निशांदेही पर चारपहिया वाहन समेत अन्य सामान बरामद करने में सफलता मिली है, वहीं अब विवेचक का रुख न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद अन्य आरोपितों की ओर है।

जेल में भी ले सकती है बयान, आरोपित अविनाश को पहले ही रिमांड पर ले चुकी है पुलिस

सूत्रों के अनुसार, पुलिस जल्द ही न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर जेल में निरुद्ध अन्य आरोपितों के बयान दर्ज करने की अनुमति मांग सकती है। पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आने पर पुलिस उनका कस्टडी रिमांड भी मांग सकती है।

अन्य पहलू भी सामने आ सकते हैं

सूत्रों ने बताया कि अविनाश शुक्ल से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और उसकी निशानदेही पर मिले कुछ महत्वपूर्ण सुरागों ने विवेचना को गति दे दी है। इन तथ्यों के आधार पर चढ़ावा से चोरी की गई रकम और उससे जुड़े अन्य पहलू भी सामने आ सकते हैं।

एसआईटी के तीनों सदस्य तो गए, पर टीम अब भी जुटा रही साक्ष्य

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के तीनों सदस्य शुक्रवार को ही यहां से रवाना हो चुके हैं, परंतु उनकी टीम में शामिल कर्मी अब भी रामजन्मभूमि परिसर में उपस्थित हैं। बताया जा रहा कि वे अधिकारियों के बताए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार ट्रस्ट की ओर से कराए गए आंतरिक ऑडिट के पुराने रिकॉर्डों को खंगाल रहे हैं और उनका सत्यापन कर रहे हैं। साथ ही भूमि खरीद से जुड़े प्रपत्रों को भी देख कर उनकी ड्राफ्टिंग कर रहे हैं।

टीम में है करीब 15 से 20 सदस्य

सूत्रों ने बताया कि इस टीम में लगभग 15-20 सदस्य मौजूद हैं। ये लोग 15 जून को ही आए थे और तबसे लगातार विभिन्न प्रकार के रिकॉर्डों का परीक्षण कर रहे हैं। छह दिनों की जांच के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के लिए तीनों सदस्य लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी रेंज किरण एस. व विशेष सचिव वित्त नीलरतन कुमार तो 20 जून को ही चले गए थे।

इन्होंने शासन को 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप कर कुछ संस्तुतियां की थीं, उसी आधार पर ट्रस्टी ने 25 जून को प्राथमिकी दर्ज करवा कर आठ आरोपितों को जेल भिजवाया था।

माना जा रहा है 15 जुलाई तक सौंपनी है जांच

इसके बाद पुलिस कार्रवाई के बीच में ही गुरुवार को फिर समय सीमा बढ़ने के बाद तीनों सदस्य अयोध्या पहुंचे थे और दोनों दिन आठ-आठ घंटे तक पड़ताल करने के बाद कुछ कागजातों को कब्जे में लेकर शुक्रवार की शाम लखनऊ चले गए थे। सूत्रों ने बताया कि सरकार को अंतिम जांच रिपोर्ट 15 जुलाई तक सौंपनी है, इस कारण कुछ नए तथ्य सामने आने पर टीम के सदस्य तीसरी बार भी आ सकते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।